ग्रीन होली खेले – पर्यावरण* *बचाए: प्रदीप डाहलिया का आह्वान
होली का पावन पर्व प्रेम, सद्भाव और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं “ट्री बैंक” के संस्थापक प्रदीप डाहलिया ने जनपदवासियों से इस वर्ष “ग्रीन होली” मनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को समझने और निभाने का अवसर भी है।
प्रदीप डाहलिया पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और जल-संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके द्वारा संचालित “ट्री बैंक” के माध्यम से हजारों लोगों को निशुल्क पौधे वितरित किए गए हैं। वे मानते हैं कि यदि प्रत्येक व्यक्ति त्योहारों को पर्यावरण के अनुकूल ढंग से मनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाले रासायनिक रंग न केवल त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक होते हैं, बल्कि ये जल स्रोतों और मिट्टी को भी प्रदूषित करते हैं। होली के बाद यही रंग नालियों के माध्यम से नदियों और तालाबों में पहुंचकर जलीय जीवों के लिए खतरा बन जाते हैं। इसलिए सभी नागरिकों को चाहिए कि वे प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों का ही प्रयोग करें।
प्रदीप डाहलिया ने सुझाव दिया कि लोग घर पर ही हल्दी, चंदन, गुलाब की पंखुड़ियों, पालक, मेहंदी और चुकंदर जैसे प्राकृतिक स्रोतों से रंग तैयार कर सकते हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि पर्यावरण पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने बच्चों और युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे पानी की बर्बादी न करें और सूखी होली खेलने की परंपरा को बढ़ावा दें।
उन्होंने यह भी कहा कि होली के दौरान बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की पिचकारियां, पॉलीथीन और अन्य अपशिष्ट सामग्री का उपयोग होता है, जो बाद में कचरे के रूप में सड़कों और पार्कों में फैल जाता है। ऐसे में सभी नागरिकों को सिंगल-यूज प्लास्टिक से परहेज करना चाहिए और कपड़े या धातु की पुन: उपयोग योग्य वस्तुओं का इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रदीप डाहलिया ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम अपने त्योहारों को भी प्रकृति के अनुरूप मनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण मिल सकता है। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि वे *“ग्रीन होली” विषय पर जागरूकता अभियान चलाएं और अधिक से अधिक लोगों को इस मुहिम से जोड़ें।*
उन्होंने कहा कि होली आपसी भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है। हमें इस दिन किसी भी प्रकार की जबरदस्ती, हुड़दंग या प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए। शांति, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में समाज को जोड़ने का कार्य करेगी।
प्रदीप डाहलिया ने यह भी प्रस्ताव रखा कि होली के अवसर पर प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए। यदि त्योहार के दिन एक-एक पौधा भी लगाया जाए, तो हजारों नए वृक्ष तैयार हो सकते हैं, जो भविष्य में स्वच्छ वायु और हरियाली प्रदान करेंगे। उन्होंने अपने “ट्री बैंक” के माध्यम से इच्छुक नागरिकों को निशुल्क पौधे उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।
अंत में उन्होंने समस्त जनपदवासियों को होली की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आइए, इस बार होली को केवल रंगों तक सीमित न रखकर इसे प्रकृति संरक्षण का संकल्प दिवस बनाएं। हम सब मिलकर रासायनिक रंगों से दूरी बनाएं, पानी की बचत करें, प्लास्टिक का उपयोग कम करें और अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर पर्यावरण की रक्षा करें।
“ग्रीन होली” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति इस दिशा में छोटा सा कदम भी उठाएगा, तो समाज और पर्यावरण दोनों को बड़ा लाभ मिलेगा।
*आप सभी को सुरक्षित, स्वस्थ एवं पर्यावरण-अनुकूल होली की हार्दिक शुभकामनाएं।*


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